किसानों को जिस प्रकार केंद्र की सरकार ने गुमराह किया सरकार स्वयं ही बेनकाब हो गई। कांता आलड़िया

Total Views : 3,987
Zoom In Zoom Out Read Later Print

भारत किसी की जागीर नहीं जो भी नेतृत्व मनमाने फैसले देशवासियों पर थोपेगा, उसकी तकदीर देशवासी हाशिए पर ला देंगे । यह मोदी सरकार को समझ लेना चाहिए ।किसानों को जिस प्रकार केंद्र की सरकार ने गुमराह किया सरकार स्वयं ही बेनकाब हो गई । झूठी वाहवाही बटोरना लंबी रेस का खेल नहीं हो सकता।

आख़िर वही हुआ जिसका ज़िक्र मैंने 26 जनवरी से ठीक एक दिन पहले किया था। किसान की ट्रैक्टर परेड़ को आर० एस० एस० बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। सरकार का चेहरा बेनक़ाब हो चुका है । किसानों की ट्रैक्टर परेड़ और आंदोलन को बदनाम करने वाली भाजपा के गुर्गे दीप सिद्धू का चेहरा सबके सामने है। हैरानी की बात है की किसान नेताओं पर सरकार और दिल्ली पुलिस मुक़दमे दर्ज कर रही है लेकिन दीप सिद्धू 26 जनवरी जैसे अति सुरक्षा के मौके पर पूरी इंटेलिजेंस और सुरक्षा एजेंसियों के नाक तले लाल किले जैसी जगह घुस कर वहां अपना झंडा लहरा देता है और इत्मिनाम ने लाइव करता है। बड़े आराम से वहां से निकल जाता है और फिर दो बार अपने ही पेज से लाइव कर बड़ी बेशर्मी से सफाई पेश करता है लेकिन पकड़ा नहीं जाता? क्योंकि ये आर० एस० एस० का पालतू है। ना इस पर मुक़द्दमा होगा और ना कोई गिरफ़्तारी। हाँ , अगले चुनाव में इसे भाजपा की तरफ़ से टिकट ज़रूर दिया जाएगा।

मेरा देश की जनता से 1 सवाल है कि 2 महीने से लगातार शांति पूर्वक कड़ाके की ठंड मे बैठकर आंदोलन करने वाला किसान-मजदूर  क्या उग्र हो सकता है? क्या आर० एस० एस० का सारा खेल संविधान को ख़त्म करके मनुस्मृति को लागू करने का है?  ये मैं कोरी बात नहीं सबूतों के साथ समझाती हूँ। मेरठ में हिन्दू महासभा ने 26 जनवरी को काला दिवस के रूप में मनाया। संविधान को निरस्त करते हुए देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की माँग की और देखिए लाल क़िले और दिल्ली में जो हुआ उसको लेकर बवाल करने वाली मोदी की पालतू मीडिया एक न्यूज़ तक नहीं दिखाती।सबूत के तौर पर ये पत्र पढ़ लीजिए जो हिंदू महासभा ने लिखा है। पत्र में अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने लिखा  है कि आज से 70-71 वर्ष पूर्व आज ही के दिन राजनेताओं ने विदेशियों के साथ षडयंत्र रचते हुए साथ मिलकर संविधान को लागू करने का काम किया था।पत्र के अंत मे आग्रह किया गया है कि देश हित में वर्तमान संविधान को निरस्त करते हुऐ देश को हिन्दू राष्ट घोषित कर देना चाहिए। इससे पूर्व भी हिन्दू महासभा द्वारा 26 जनवरी को काला दिवस के तौर पर मनाने की ख़बरें हैं। वनइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में भी हिन्दू महासभा ने काला दिवस मनाते हुए काला झंडा फहराया था।



वहीं ताज़ा मामले पर मेरठ पुलिस का कहना है कि उक्त संबंध मे थाना ब्रहमपुरी पुलिस द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। देश की मौजूदा सरकार के मंसूबे, किसान-मजदूर या यूं कहें हमारे देश के कमेरा वर्ग के मसीहा सर छोटूराम जी, बाबा साहब डाo बी आर अम्बेडकर जी के सपनों के भारत को मिटाकर मनुवाद को स्थापित करने के लिए किसानों को किसी भी हद तक बदनाम करके, देश मे गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करके रबङ स्टैम्प महामहिम राष्ट्रपति के हाथों देश मे आपातकाल लगा कर एक दलित द्वारा बनाये गये संविधान को एक गुलाम दलित के हाथों खत्म करके मनुस्मृति लागू करके भविष्य मे लोकतंत्र खत्म करके चुनाव प्रणाली को ही खत्म करना है और देशभक्त, सामाजिक कार्यकर्ताओं, देशप्रेमियो को जेलों मे ठूस कर देशद्रोही,आतंक वादी घोषित करना है।

आज 85% कमेरा वर्ग को जाति पाति का बंधन तोङ कर एक जुट होकर 1जनवरी 1818 जैसा युद्ध लङकर भारत की पावन धरा को RSS के चंगुल से आजाद करवाने के लिये जान की बाजी लगानी पङेगी ।जब तक RSS  को मुहतोड़ जबाब नही दिया जायेगा, तब तक कमेरा वर्ग को न्याय नही मिल सकता। इसलिए मेरी सभी से विनती है कि RSS के खिलाफ पूरे देश मे मोर्चा खोला जाये और एक ऐसी मुहिम चलाई जाये जिसमे 85% कमेरा वर्ग जो RSS के साथ मिला हुआ है उनकी घर वापसी करवाकर RSS की ताकत खत्म की जाये । इतिहास गवाह है कि RSS ने हमेशा हमारे पूर्वजों व हमारे समाज के लोगों को मरवा कर जीत हासिल की है । RSS कभी ताकत से नही लङता , हमेशा छल कपट का सहारा लेकर हमारे ही भाईयों द्वारा हमारी हत्या करवाई जाती है। इसलिए सर छोटूराम जी की बात आज सच साबित करनी है कि "ऐ मेरे भोले किसान दुश्मन को पहचानन, और बोलना सीख," आज इस विचार की सख्त आवश्यकता है क्योंकि मनी, माफिया , मिडिया सब RSS का है।

आर० एस० एस० का इतिहास उठा कर देखिए। ये लोग अंग्रेजों के पिट्ठू रहे हैं। आर० एस० एस० के लोगों में से कभी किसी ने भारत को आज़ाद कराने में सहयोग नहीं दिया। कोई भी स्वतंत्रता सेनानी आर० एस० एस० से नहीं है। बल्कि इनके आकाओं ने अग्रेंजो से माफी मांगी है जिनको ये वीर की संज्ञा देते हैं और यही लोग आज भी भारत को ग़ुलाम बनाना चाहतें हैं और विदेशी ताक़तों को बेचना चाहतें हैं। जो संविधान बाबा साहेब ने बनाया उसे ख़त्म कर ये लोग उस मनुस्मृति को लागू करना चाहते हैं, जिसमे इंसानियत का खून किया गया है। जिस मनुस्मृति मे महिलाओं को मात्र पुरूष को खुश करने का खिलौना बताया गया है, वो मनुस्मृति जिस मे इंसान के गले में  मटकी बाँधकर चलना और पैरों के निशान मिटाने के लिये कमर पर झाडू बाँधकर चलना व  हत्या, बलात्कार, जैसे संगीन जुर्म को भी न्याय संगत बताया गया है। मनुस्मृति का पूरा अध्ययन करने के बाद  बाबा साहब डाo बी आर अम्बेडकर ने 25 दिसंबर 1928  को जला दिया  था। क्योंकि मनुस्मृति मानवता की हत्यारी ही नहीं बल्कि 85% जनता की गुलामी की प्रतीक है। 

मनुस्मृति को लागू करके ये गंदी और निक्कमी सरकार देश को बर्बाद करना चाहती है और दोबारा से 85% कमेरा वर्ग जो असली भारतीय है उसे गुलाम बनाना चाहती है, किसान आन्दोलन तो सिर्फ मोहरा है ।

(कांता आलड़िया , मिशन एकता समिति , रोहतक की प्रदेशाध्यक्ष है। लेख में व्यक्त उनके विचार निजी है।)



See More

Latest Photos