योग, मानवता के एकत्व की ओर...

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योग सार्वभौमिक है, योग सभी जाति, रंग, क्षेत्र और धर्म से ऊपर है।

'मानवता के लिए योग' अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का यह थीम मानवता और भाईचारा को समर्पित किया गया है। विश्वभर में सभी ने मानवीय गुणों द्वारा जिस तरह जरूरतमंदों की सहायता की, सभी क्षेत्र से स्वयंसेवी आगे आऐ और बचाव और सेवा का उदाहरण पेश किया, वो मानवता का उल्लेखनीय उदाहरण है।

भारत की प्राचीन विरासत 'योग' विश्वभर में स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन शैली का प्रचार और प्रसार भी कर रही है। 'योग‘ शब्द संस्कृत का अर्थ है जिसका अर्थ है समन्वय या जुड़ना यानी शरीर और मन को एकत्व प्राप्त होना। आज  योग मानवता के एकत्व को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है जो कि शांति और सद्भावना पर विश्वास का प्रतीक भी है, आध्यात्मिकता, ध्यान की दृढ़ता है, आत्म-निरीक्षण और स्व की अनुभूति भी है।

योग शांति और सद्भावना की सार्वभौमिक भाषा है, जो  शांति और सद्भावना की  निरंतरता बनाए रखने में सहायक है। योग सार्वभौमिक है, योग सभी जाति, रंग, क्षेत्र और धर्म से ऊपर है। कोई भी व्यक्ति, जाति या धर्म, योग को अपना सकते हैं । यह शरीर और मन को नियंत्रित करता है।

21 जून का विशेष दिन 'योग' के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का दिन और हम सभी के लिए गर्व का अहसास भी है क्योंकि योग हमारे देश में साधना, प्रेम, स्वास्थ्य, अध्ययन और आजीविका का स्त्रोत भी है। योग के प्रति विभिन्न भ्रांतियों से सचेत रहते हुए हम एक स्वस्थ और स्वच्छ जीवन शैली को अपनाएं तो निश्चय ही हम योग के अभीष्ट परिणामों से लाभान्वित होंगे ।

 डॉ. प्रज्ञा कौशिक, मीडिया ऐजूकेटर

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