Free Food for Everyone: Food for Soul.

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ये आशीर्वाद मज़दूरों के, झुग्गी में रहने वाले, ग़ुब्बारे बेचने वाले, फूटपाथ पर सोने वाले उन सभी बच्चों पर बरसता है जो लज़ीज़ खाने को तरसते हैं। जिनके हिस्से में अक्सर लोगों की जूठन या बचाखुचा खाना आता है।

देविना यानी आशीर्वाद। 

देविना उन लोगों के लिए आशीर्वाद है 

जो एक वक्त के भोजन की जुगत में दिन रात मेहनत करते हैं। वो सफ़ाई कर्मचारी जो कोरोना जैसी महामारी में भी काम करते हैं।  ये आशीर्वाद मज़दूरों के, झुग्गी में रहने वाले, ग़ुब्बारे बेचने वाले, फूटपाथ पर सोने वाले उन सभी बच्चों पर बरसता है जो लज़ीज़ खाने को तरसते हैं। जिनके हिस्से में अक्सर लोगों की जूठन या  बचाखुचा खाना आता है। 

ये आशीर्वाद है "देविना"

रोहतक शहर की रहने वाली देविना, MDU से English Literature में PhD कर रही हैं। बेहतरीन कुक हैं। कुकिंग पर देविना ने एक book भी लॉंच की जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा ने किया। जिस उम्र में अक्सर युवा सिर्फ़ अपने क़रियर पर ध्यान देते हैं, भविष्य के सपने संजोते हैं। उस उम्र में देविना पढ़ाई के साथ साथ अपने हाथों से झुग्गी और मज़दूरों के बच्चों के लिए लज़ीज़ खाना बनाती है और उन्हें खिलाती है। सफ़ाई कर्मचारियों को देविना रोज़ाना दूध और फ़ल देती है। 

The Bell TV  से बात करते हुए देविना ने बताया की कोरोना महामारी में लॉकडाउन के दौरान हमलोग अलग अलग तरह की dishes बना कर खाते हैं। लेकिन हमारे आस पास ऐसे भी लोग हैं जिन्हें एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता। बस यही बात मुझे अंदर से कचोटती थी। फिर मैंने फ़ैसला किया की अब मुझे इन लोगों की मदद करनी है। 

किन लोगों तक पहुँचाती है खाना-

देविना बताती हैं की वो झुग्गी, लेबर, ग़ुब्बारे वाले, गली मोहल्ले में भीख माँगने वाले बच्चों के लिए खुद अपने हाथों से उनकी पसंद का खाना या दूसरी कोई dish बनाती है। कम से कम सौ बच्चों के लिए ये चीज़ें बनाई जाती है। कुष्ठ आश्रम में लोगों के लिए बना कर के जाती हूँ। नगर निगम सफ़ाई कर्मचारियों को दूध और फ़ल ज़रूर देती हूँ। आसपास लेबर के बच्चों को घर में बैठा कर खाना बनाकर खिलाती हूँ। बच्चों के लिए कभी केक तो कभी कोई दूसरी dish बनाती हूँ , जो उनकी पसंद की होती है।

इस काम में मदद कौन करता है? 

मदद के बारे में देविना ने बताया की अलग अलग recipes बनाने के लिए जिन चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है उसमें मदद मेरे मामा जी करते हैं। मेरी ताई जी नई नई recipes के बारे में बताती है । कोई भी dish बनाने में मम्मी मदद करती है। अपने घर के किचन में ही सब बनाती हूँ। financially मम्मी का support मिलता है क्योंकि dishes बनाने का सामान भी महंगा आता है। 

ये सब करने की प्रेरणा किस से मिली ? 

अपनी दादी और अभिनय टोली से।अपनी दादी को मैंने कभी नहीं देखा क्योंकि मेरे पैदा होने से एक साल पहले उनका देहांत हो गया था। मेरी दादी की लिखी एक डायरी मुझे मिली। असल में इसमें दादी ने अलग अलग recipes नोट की हुई थी। अक्सर जान पहचान वाले और रिश्तेदार बताते थे की मेरी दादी बहुत अच्छा खाना बनाती थी और घर में आने वाले सभी लोगों को बिना खाए नहीं जाने देती थी। नगरनिगम के बहुत से कर्मचारी भी बताते हैं की तुम्हारी दादी हम सबके लिए खाना भेजती थी, घर बुला कर खिलाती थी और डब्बा पैक कर के भी देती थी।

सबके मुँह से दादी की बातें सुनकर मैंने सोच लिया था की दादी की परम्परा को आगे बढ़ाऊँगी। दादी तो नहीं है लेकिन दादी की recipes की डायरी आशीर्वाद के रूप में मिली जो मैंने संजो कर रखी है। उनकी legacy को आगे बढ़ाना और लोगों की सेवा करना मेरा मक़सद है । ये सब करने में सुकून भी मिलता है। 

अपने पिता और दादा, दादी की बरसी पर भी देविना ग़रीबों के लिए खाना बनाती और बाँटती है।

टीचर भी है देविना

देविना MDU के English department  पढ़ातीं भी हैं। COVID में जहां ज़्यादातर लोग और ख़ासकर students mental health issues से जूझ रहे हैं, ऐसे में देविना अपने students से उनकी mental health को लेकर सजग रहती हैं। उनकी problem को ध्यान से सुनती है और उसको solve करने की कोशिश भी करती हैं।

अपनी creativity देविना सिर्फ़ लज़ीज़ पकवान बनाने में नहीं बल्कि घर के waste material समझें जाने वाले समान को अपनी creativity से नया रूप देना भी जानती है। फिर चाहे नारियल के खोल पर रंग कर के सकोरे बनाने हो या पत्थरों पर रंग के उन पर positive message लिखने हो।

रिश्तेदार, यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर, जान पहचान वाले सब देविना के खाने को बेहद पसंद करते हैं । देविना कुकिंग भी सिखाती  हैं वो भी बिल्कुल फ़्री। प्रवासी मज़दूरों के बच्चों को भी कुकिंग सिखाती है। देविना से कुकिंग सीखने वाला  प्रवासी मज़दूर का बच्चा अपनी पढ़ाई के बाद अंडे की रैहड़ी लगाता हैं।

किसान आंदोलन का किया समर्थन

देविना कहती हैं कि अन्न, फ़ल, सब्ज़ियाँ और दूध सब देश के किसानों की बदौलत हमें मिलता है। किसान है तो देश है और उनका सम्मान सबको करना चाहिए। किसान आंदोलन में जाकर देविना ने कम्बल बाँटे और इतनी ठंड में किसान महिलाएँ जिस तरीक़े से borders पर डटी हुई है उसको लेकर उनकी हौसला अफ़्जाई भी की।

The Bell TV देविना को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता है। लोगों पर ये "आशीर्वाद" बना रहे।

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