किसानों के साथ धरनों पर बैठी है वह भी महिलाएं हैं, उनकी चिंता क्यों नहीं है?

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कांग्रेस महिला विधायकों को लेकर जो बयान दिया है उस पर प्रतिक्रिया देते हुए बल्लू प्रधान ने कहा की मुख्यमंत्री महोदय जो किसानों के साथ धरनों पर बैठी है वह भी महिलाएं हैं। जो सर्दी गर्मी सहते हुए अपनी मांगों को लेकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर धरना स्थलों पर बैठी हैं। उनके बारे में भी आपको चिंता क्यों नहीं है।ये दौहरी नीति क्यों ?

भारतीय किसान यूनियन अंबावता के प्रदेश अध्यक्ष अनिल नांदल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जो यह विभिन्न कार्यक्रम तय किए गए हैं उनमें हम सबको बढ़-चढ़कर भाग लेना है ताकि सरकार को यह एहसास हो जाए, कि किसान तब तक वापस नहीं जाएगा जब तक यह कृषि कानून वापस नहीं होंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कांग्रेस महिला विधायकों को लेकर जो बयान दिया है, उस पर प्रतिक्रिया देते हुए बल्लू प्रधान ने कहा की मुख्यमंत्री महोदय जो किसानों के साथ धरनों पर बैठी है वह भी महिलाएं हैं। जो सर्दी गर्मी सहते हुए अपनी मांगों को लेकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर धरना स्थलों पर बैठी हैं, उनके बारे में भी आपको चिंता क्यों नहीं है।ये दौहरी नीति क्यों ?  

अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान ने कहा कि सरकार को ये कृषि कानून वापस लेने ही होंगे। क्योंकि महिला शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जब देश की ताकत किसान आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही है तो किसान तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे और सरकार एमएसपी की गारंटी नहीं देगी। 

किसान आंदोलन लगातार शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और सरकार किसानों की धैर्य की परीक्षा ले रही है। इसके साथ-साथ उन्होंने बताया कि वह कोलकाता का दौरा करके लौटे हैं जहां पर किसान आंदोलन की गूंज पहुंच चुकी है और भाजपा की वहां किरकिरी हो रही है और चुनाव में भाजपा को वहां मुंह की खानी पड़ सकती है। जहां-जहां भी देश में चुनाव होंगे वहीं लोगों के बीच जाकर सरकार की जन विरोधी नीतियों का प्रचार किया जाएगा।

अनिल नांदल ने चरणबद्ध कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए कहा कि आंदोलन के 4 महीने पूरे होने पर 26 मार्च को भारत बंद किया जाएगा है। और अब की बार भारत बंद 4 घंटे का नहीं बल्कि पूरे दिन का रहेगा। 28 मार्च को नए तीन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर होली मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके पहले 15 मार्च को पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बढ़ रहे दामों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होंगे और 19 मार्च को किसान खेती बचाओ-मंडी बचाओ दिवस मनाएंगे, सभी मंडियों में पहुंचकर प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।

इसी कड़ी में 23 मार्च को शहीदे आजम भगत सिंह का बलिदान दिवस मनाया जाएगा। भाकियू नेता अनिल नांदल ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, इस अविश्वास प्रस्ताव में विधायकों का नकली चेहरा सामने आ गया है, जो किसानों के साथ होने का दंभ भरते थे वे कुर्सी से चिपके हुए नजर आए। साथ ही उन्होंने जेजेपी और भाजपा के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर वे किसी गांव में घुसते हैं और उनका विरोध होता है तो उसके लिए खुद जिम्मेदार होंगे।

अनिल नांदल ने कहा कि किसानों का आंदोलन तब तक मजबूती और शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहेगा जब तक केंद्र सरकार इन तीन नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी ।

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