भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक को नया नेतृत्व मिला है। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने डॉ. एच.के. अग्रवाल को स्थायी कुलपति नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। इस खबर के सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में बधाईयों की बौछार लग गई और हर तरफ उत्साह का माहौल बन गया।
डॉ. अग्रवाल का नाम पीजीआईएमएस, रोहतक से किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यहीं से उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू की और पूरे 35 साल तक संस्था व समाज की निस्वार्थ सेवा की। 6 अप्रैल 2016 से वे विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पद पर कार्यरत हैं और 29 नवंबर 2024 से कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे थे।
शैक्षणिक और शोध में अद्वितीय योगदान
200+ शोध-पत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित
180+ कार्यशालाओं, सम्मेलनों व सीएमई में सक्रिय भागीदारी
65 से अधिक एमडी व शोधार्थियों का मार्गदर्शन
मास्टर टीचर अवॉर्ड, लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड समेत कई सम्मान

डॉ. अग्रवाल कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थाओं के फेलो व आजीवन सदस्य हैं। उनका शोध कार्य चिकित्सा जगत में एक मानक के रूप में देखा जाता है।
विश्व पटल पर चमकाया नाम
वर्ष 2002 में उन्हें सीएपीडी फेलोशिप (CAPD Fellowship) से सम्मानित किया गया, जो इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी द्वारा प्रदान की जाती है। उन्होंने जर्मनी, जापान, सिंगापुर, ब्राज़ील, इटली, तुर्की और कनाडा में अपने शोध कार्य प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया।
समाज सेवा में भी अग्रणी
चिकित्सा क्षेत्र के साथ-साथ डॉ. अग्रवाल समाज सेवा में भी सक्रिय हैं। वे रोगी कल्याण समिति, पीजीआईएमएस के सदस्य हैं और अग्रवाल डेवलपमेंट ट्रस्ट से जुड़े हैं। समाज सुधार सभा, हरियाणा ने उन्हें बेस्ट मेडिकल अवॉर्ड से नवाजा है।
भविष्य का लक्ष्य – देश के शीर्ष 3 संस्थानों में स्थान
कुलपति पद संभालने के बाद डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को देश के शीर्ष तीन स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल करना है। वे संकाय और कर्मचारियों के साथ मिलकर शिक्षा, शोध और रोगी देखभाल के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह नियुक्ति न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि हरियाणा के चिकित्सा और शिक्षा जगत के लिए भी एक नई ऊर्जा और उम्मीद लेकर आई है।
